- Author, प्रवीण
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 6 मिनट
सोमवार को देश की राजधानी दिल्ली के दिल सेंट्रल दिल्ली में दिनभर हंगामा होता रहा. बात चाहे कनॉट प्लेस (सीपी) की हो, जनपथ की या फिर जंतर-मंतर की, कुछ नज़र आ रहा था वो थी हज़ारों, हज़ार युवाओं की भीड़.
जो कई जगहों पर मेट्रो स्टेशनों, सड़कों के बंद होने के बावजूद तमाम मुश्किलों को पार करते हुए सोमवार सुबह से ही जंतर-मंतर पर पहुंचने की कोशिशों में जुटे थे.
लाठियों और आंसू गैस के गोलों के बीच ये युवा सुबह से लेकर देर शाम तक जंतर-मंतर पर जमे रहे.
शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर बीते करीब एक महीने से कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की अगुवाई में आंदोलन चल रहा है.
एक सवाल बार-बार उठ रहा था कि जिस कॉकरोच जनता पार्टी को सोशल मीडिया पर कुछ ही दिनों के अंदर करोड़ों फॉलोअर्स मिल गए थे, वो आख़िर ज़मीन पर कितनी मजबूत है?
लेकिन सोमवार को इस बात का जवाब मिल गया. कॉलेज में पढ़ने और परीक्षाओं की तैयारियों करने वाले बच्चे बड़ी तादाद में सड़क पर उतरे और दिखाया कि सरकार के लिए उनके सवालों पर लंबे वक्त तक चुप्पी बनाए रखना मुमकिन नहीं होगा.
युवाओं के इस आंदोलन को बीते एक महीने से कवर कर रही स्वतंत्र पत्रकार स्मिता शर्मा का मानना है कि इन बच्चों ने केंद्र सरकार को संदेश दे दिया है कि परेशानी सिर्फ़ शिक्षा व्यवस्था की नहीं है, बल्कि महंगाई, बेरोज़गारी जैसे दूसरे मुद्दों पर को भी वो अनदेखा नहीं कर सकती है.
'युवा सिर्फ़ अपने लिए नहीं लड़ रहे'
दरअसल, कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर सोमवार को संसद मार्च का आह्वान किया गया था. इसी कॉल के मद्देनज़र बड़ी संख्या में युवा दिल्ली की सड़कों पर उतरे.
शुरुआती हंगामे के बीच सीजेपी ने दावा किया कि सरकार ने उन्हें बातचीत के लिए बुलाया था.
वहीं केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा का कहना था कि प्रदर्शनकारियों की ओर से बातचीत का प्रस्ताव आया था.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने एक्स पर मुलाक़ात की तस्वीर पोस्ट की है. उन्होंने लिखा, "आज सुबह पहली बार प्रदर्शनकारियों की ओर से सरकार के साथ बातचीत करने का प्रस्ताव आया और सुबह 11:50 बजे से ही हमारी बातचीत जारी है."
"सौहार्दपूर्ण वातावरण में मुलाक़ात हुई. उनके डेलीगेशन के साथ विस्तार से पहले मौखिक चर्चा हुई और फिर उनके द्वारा लगभग 4 बजे मुझे लिखित याचिका दी गई. मैंने सभी प्रदर्शनकारियों से अनुरोध किया कि वे अपने धरने को समाप्त करें और सामान्य स्थिति बहाल करने में प्रशासन की मदद करें."
हालांकि युवाओं के इतने बड़े प्रदर्शन के बावजूद सीजेपी की मुख्य मांग को अभी तक केंद्र सरकार ने स्वीकार नहीं किया है. लेकिन इस बीच ये सवाल है कि आखिर युवाओं के सड़क पर उतरने का हासिल क्या रहा?
इस बात का जवाब हमने आंदोलन पर नज़र रखने वाले पत्रकार और एक्सपर्ट्स से खोजने की कोशिश की है.
आंदोलन का समर्थन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने सोमवार को जंतर-मंतर पर कहा, "आज जंतर-मंतर पर मैं जिस नई पीढ़ी को देख रहा हूं, उससे मेरा विश्वास और मजबूत हुआ है. ये युवा सिर्फ़ अपने लिए नहीं लड़ रहे. वे ऐसी शिक्षा व्यवस्था के लिए लड़ रहे हैं जो न्यायपूर्ण हो, ऐसी अर्थव्यवस्था के लिए जो रोज़गार दे, और ऐसी राजनीति के लिए जो जनता के प्रति जवाबदेह हो."
ख़तरे की घंटी?
इसी बात को आगे बढ़ाते हुए स्मिता शर्मा ने कहा कि सोमवार के प्रदर्शन की सबसे बड़ी बात यह थी कि किसी ने भी इस बात का अनुमान नहीं लगाया था कि इतनी बड़ी तादाद में युवा सड़क पर उतरेंगे.
स्मिता शर्मा सोमवार के प्रदर्शन को लीडरलैस आंदोलन के तौर पर भी देख रही हैं.
उन्होंने कहा, "इंटरनेट बंद था. सीजेपी के नेता अपनी बातों को आगे नहीं पहुंचा पा रहे थे. मेट्रो स्टेशन बंद थे. मैसेज पहुंचना आसान नहीं था. आंदोलन शिक्षा का था, लेकिन बात बढ़कर महंगाई, बेरोज़गारी और वोट चोरी तक हुई. ये बात 12वीं कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों से लेकर कॉलेज में पढ़ने वाले बच्चों ने की, ये अपने आप में बहुत ही ज्यादा यूनिक बात रही."
इस आंदोलन से सरकार के लिए चुनौती आने वाले वक्त में कितनी बढ़ने वाली है?, इस सवाल पर स्मिता शर्मा ने कहा, "अगर सरकार इस प्रदर्शन से कोई मैसेज नहीं लेती है तो ये उसकी बड़ी ग़लती होगी. क्योंकि युवाओं ने ये साफ़ किया कि वो संसद मार्च के लिए बेताब थे. सीजेपी अगर उन्हें संसद मार्च से रोकती तो भी जंतर-मंतर पर हज़ारों की भीड़ संसद मार्च करती."
"उनके लाठियों से मारा गया. बावजूद उसके वो वापस आ रहे थे, उनका सामना कर रहे थे. सरकार के लिए एक गंभीर मैसेज है कि एक निराशा है जिसे अगर नहीं सुना जाता है तो आज जिस तरह से एक गुब्बारा फटा है. वो आने वाले दिनों में फिर से भी फट सकता है."
वरिष्ठ पत्रकार हेमंत अत्री भी स्मिता शर्मा की बात को आगे बढ़ाते हुए कहते हैं कि युवाओं का यह प्रदर्शन आने वाले दिनों में मोदी सरकार के लिए परेशानी का सबब बनने वाला है.
उन्होने कहा, "इसका प्रदर्शन का जो हासिल है वो ये है कि मोदी सरकार अब तक इस देश के लोगों को फॉर ग्रांटेड मान के चल रही थी, उसका वो भ्रम टूट गया है. ऐसा नहीं है कि लोग आए और चुपचाप चले गए. उन्होंने दिखाया कि इस देश में जनतंत्र जो है मजबूत है, उसकी जड़ें मजबूत हैं. सरकार उसे कमजोर नहीं कर सकती."
"युवाओं की किसी भी देश के लिए ना केवल वर्तमान बल्कि भविष्य के हिसाब से भी एक बहुत ही महत्वपूर्ण और निर्णायक भूमिका रहती है. फिर चाहे सरकारों का चुनना हो या फिर सरकार का बदलाव."
"सरकार के लिए ये अलार्मिंग बेल है. वो लंबे समय जनता को अनदेखा नहीं कर पाएंगे. सरकार को जवाबदेही तय करनी पड़ेगी वरना जनता सड़कों पर आना भूली नहीं. इसका असर लंबे समय में दिखाई देगा. हमारा लोकतंत्र हमें खैरात में नहीं मिला है, हमने उसे हासिल किया है. और जो दिल्ली की सड़कों पर दिखाई दिया, वही हमारे लोकतंत्र की शक्ति है."
हेमंत अत्री कहते हैं, "सरकार को लगता है कि हिंदू-मुस्लिम के नाम पर उसकी राजनीति चल सकती है. तो ऐसा नहीं होने वाला. जनता मूल मुद्दों पर वापस आ रही है और यह युवाओं का इस तरह से आगे आना सरकार के लिए बड़े खतरे की घंटी है. उसे अपना कामकाज सुधारना होगा."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें
BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह
कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.
Facts Only
* Thousands of youths assembled in Central Delhi locations, including Jantar Mantar, कनॉट प्लेस (CP), and Janpath.
* Protestors attempted to reach Jantar Mantar despite road closures and metro station closures.
* The movement involved demands for educational system reforms and the resignation of Education Minister Dharmendra Pradhan.
* The Cockroach Janata Party (CJP) led the agitation.
* Central Minister JP Nadda stated that a proposal for discussion was received from the protestors.
* Union Health Minister JP Nadda posted a picture of the meeting, stating discussions occurred and a written petition was received.
* Social activists claimed the movement addressed issues like inflation and unemployment.
